पटना: पटना में NEET की तैयारी कर रही नाबालिग छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। विशेष जांच टीम इस केस को एक अलग घटना नहीं, बल्कि घटनाओं की पूरी श्रृंखला के रूप में खंगाल रही है। जांच का फोकस छात्रा की पूरी डिजिटल और भौतिक गतिविधियों पर है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उसके साथ क्या हुआ, कब हुआ और कहां हुआ। अब तक 25 लोगों के DNA सैंपल लिए जा चुके हैं, जिनमें शंभू गर्ल्स हॉस्टल से जुड़े लोग, हॉस्टल आने-जाने वाले युवक, छात्रा को अस्पताल पहुंचाने वाले, परिजन और करीबी शामिल हैं। जांच के दायरे में हॉस्टल संचालक के बेटे का नाम भी आया है, जिसका DNA सैंपल लिया जा चुका है। FSL जांच में छात्रा के कपड़ों से स्पर्म मिलने के बाद DNA मिलान इस केस का सबसे अहम आधार बन गया है। सभी सैंपल जज की मौजूदगी में मेडिकल गाइडलाइन के तहत लेकर सील कर FSL भेजे गए हैं, ताकि कोर्ट में किसी तरह का विवाद न रहे, हालांकि परिजनों ने सैंपलिंग प्रक्रिया पर आपत्ति भी दर्ज कराई है। SIT छात्रा की 27 दिसंबर से 6 जनवरी तक की 11 दिन की ट्रैवल हिस्ट्री की बारीकी से जांच कर रही है, जिसमें पटना से जहानाबाद और फिर वापस पटना तक की हर मूवमेंट को मैप किया गया है। स्कॉर्पियो ड्राइवर, ऑटो चालक और ट्रेन टाइमिंग तक की पुष्टि की जा चुकी है। मोबाइल टावर लोकेशन, गूगल लोकेशन हिस्ट्री और CCTV फुटेज के जरिए यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि इस दौरान छात्रा के संपर्क में कोई अनजान व्यक्ति तो नहीं आया। डिजिटल जांच में खास तौर पर 5 जनवरी की शाम से 6 जनवरी दोपहर 2 बजे तक का डेटा अहम माना जा रहा है, जिसे संदिग्धों की लोकेशन से क्रॉस वेरिफाई किया जा रहा है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड और एक महीने की मोबाइल सर्च हिस्ट्री भी जांच के दायरे में है, जिसमें नींद की गोली से जुड़ी सर्च ने जांच एजेंसियों को नई दिशा दी है। पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि क्या छात्रा पर किसी तरह का दबाव था या उसे कोई दवा दी गई। SIT ने 27 दिसंबर से 11 जनवरी तक की पूरी इवेंट सीक्वेंस तैयार कर ली है, जिसमें हॉस्टल, अस्पताल और इलाज से जुड़ी हर कड़ी शामिल है। AIIMS की टीम ने सीन रीक्रिएशन भी किया है। छात्रा के नाबालिग होने के कारण केस में POCSO एक्ट की धाराएं जोड़ी गई हैं। अब सवाल सिर्फ सच्चाई सामने लाने का नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने का है कि कोई भी कड़ी छूटे नहीं, क्योंकि इसी में न्याय की असली बुनियाद छिपी है।

