Patna : बिहार में रेल परिवहन की तस्वीर बदलने का वक्त आ गया है! राज्य सरकार ने रेलवे बोर्ड के सामने छह ऐसे प्रस्ताव रखे हैं जो न सिर्फ बिहार के नक्शे को बदल देंगे बल्कि लाखों यात्रियों के लिए सुनहरे सपने को हकीकत में तब्दील कर देंगे। मुख्य सचिव अमृतलाल मीणा ने रेलवे बोर्ड के चेयरमैन को भेजे अपने विशेष पत्र में बिहार की रेल व्यवस्था की दुर्दशा का खुलासा करते हुए कहा है कि राज्य में प्रति लाख जनसंख्या पर मात्र 5.31 किमी रेलवे ट्रैक उपलब्ध है जबकि राष्ट्रीय औसत 9.81 है। यही कारण है कि देश के सबसे घनी आबादी वाले इस राज्य को रेल नेटवर्क की सख्त जरूरत है।
बुद्ध सर्किट का जादू चलेगा
सबसे दिलचस्प प्रस्ताव है बुद्ध सर्किट रेल कॉरिडोर का। पटना-गया-तिलैया-राजगीर-फतुहा रूट पर एक सर्कुलर ट्रेन सेवा शुरू होगी जो धर्म और पर्यटन के शौकीनों के लिए वरदान साबित होगी। बोधगया और राजगीर जाने वाले तीर्थयात्रियों को अब इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं होगी।
दक्षिण बिहार में मुंबई स्टाइल लोकल ट्रेन!
दक्षिण बिहार के लिए तो सोने पे सुहागा वाली बात है। बक्सर, भोजपुर, रोहतास, लखीसराय, मुंगेर, शेखपुरा, भागलपुर, जमुई और बांका जिलों को राजधानी पटना से जोड़ने के लिए मुंबई स्टाइल लोकल ट्रेन सेवा का प्रस्ताव है। अब गांव-कस्बे से पटना आना-जाना उतना ही आसान हो जाएगा जितना मुंबई में है।
उत्तर बिहार भी नहीं रहेगा पीछे
उत्तर बिहार के सीवान, सारण, वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और दरभंगा जिलों के लिए भी उपनगरीय परिवहन नेटवर्क का खाका तैयार है। सीवान-छपरा-हाजीपुर-मुजफ्फरपुर-समस्तीपुर-दरभंगा सेक्टर में तीसरी और चौथी रेल लाइन का निर्माण होगा।
पटना के चारों ओर उगेंगे सैटेलाइट टाउन
सबसे रोमांचक बात यह है कि फतुहा और बिदुपुर के बीच नया रेल पुल बनने से पटना रीजनल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क तैयार होगा। इससे पटना के आसपास 5 सैटेलाइट टाउन सह मल्टी-मॉडल हब बनाने का सपना साकार होगा।
आरा-छपरा को मिली नई उम्मीद
आरा और छपरा के बीच नया रेल पुल बनने से उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच यातायात की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। फिलहाल जेपी सेतु, राजेंद्र सेतु और मुंगेर घाट पुल ही एकमात्र विकल्प हैं।
DDU-बक्सर सेक्टर में भी तेजी
डीडीयू-बक्सर-आरा-पटना-किउल खंड पर भारी भीड़ को देखते हुए तीसरी और चौथी रेलवे लाइन के लिए तत्काल मंजूरी की मांग की गई है। राज्य सरकार ने गुलजारबाग-पटना सिटी जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में भूमि अधिग्रहण के लिए पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है।
मुख्य सचिव ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से कहा है कि राज्य सरकार इन सभी परियोजनाओं के कार्यान्वयन में हरसंभव सहायता करेगी। अब देखना यह है कि रेलवे बोर्ड इन प्रस्तावों पर कितनी जल्दी मुहर लगाता है।यदि ये सभी प्रोजेक्ट्स मंजूर हो जाते हैं तो बिहार की रेल व्यवस्था में एक नया अध्याय शुरू होगा और राज्य का आर्थिक विकास भी तेज गति पकड़ेगा।

